500%? Tariff hike – ट्रंप के रूस प्रतिबंध विधेयक के समर्थन से भारत पर भारी टैरिफ झटके की आशंका

500%? Tariff hike –   ट्रंप के रूस प्रतिबंध विधेयक के समर्थन से भारत पर भारी टैरिफ झटके की आशंका

भारत के लिए एक बड़ा व्यापारिक तूफान उठ सकता है, क्योंकि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक शक्तिशाली रूस प्रतिबंध विधेयक का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव के तहत रूसी तेल खरीद जारी रखने वाले देशों पर 50% से लेकर चौंकाने वाले 500% तक के दंडात्मक टैरिफ लगाए जा सकते हैं।

यह प्रस्तावित कानू

न—जिसे अक्सर “सैंक्शनिंग रशिया एक्ट” कहा जाता है—यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को की आय पर लगाम लगाने का लक्ष्य रखता है। लेकिन इसके व्यापक प्रभाव भारत पर गंभीर रूप से पड़ सकते हैं, जो रियायती रूसी कच्चे तेल का दुनिया के सबसे बड़े आयातकों में से एक है।

🔥 भारत के लिए क्या दांव पर है?

इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को द्वितीयक प्रतिबंध लगाने के व्यापक अधिकार मिलेंगे, जिनमें ऊर्जा व्यापार के जरिए रूस को आर्थिक समर्थन देने वाले देशों पर कड़े आयात टैरिफ शामिल हैं।

  • भारत पहले से ही अमेरिका को किए जाने वाले कुछ निर्यातों पर करीब 50% टैरिफ का सामना कर रहा है।

  • यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो टैरिफ 500% तक पहुंच सकते हैं, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद लगभग अप्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।

📉 निशाने पर कौन-से सेक्टर?

निर्यात पर निर्भर उद्योग, जैसे:

  • टेक्सटाइल और परिधान

  • सीफूड

  • इंजीनियरिंग सामान

  • धातु और मैन्युफैक्चरिंग

को भारी झटका लग सकता है। व्यापार में बाधा की आशंकाओं से बाजार पहले ही घबराया हुआ है और निर्यात-आधारित शेयरों में तेज गिरावट देखी गई है।

🌍 कूटनीतिक संतुलन

जहां वॉशिंगटन इस कदम को मॉस्को पर जरूरी दबाव मानता है, वहीं नई दिल्ली का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित उसके तेल आयात फैसलों का आधार हैं। खबरों के मुताबिक, भारत ने रूसी तेल खरीद की पुनर्समीक्षा शुरू कर दी है और संभावित व्यापार टकराव से बचने के लिए अमेरिका के साथ कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं।

⏳ आगे क्या?

इस विधेयक को अभी अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी मिलनी बाकी है, यानी 500% टैरिफ का खतरा फिलहाल तय नहीं है। हालांकि, ट्रंप के समर्थन से—खासकर यदि वे सत्ता में लौटते हैं—कड़े कदम उठने की संभावना बढ़ गई है।

🧭 बड़ा परिप्रेक्ष्य

यदि यह कानून बनता है, तो:

  • भारत–अमेरिका व्यापार संबंध प्रभावित हो सकते हैं

  • वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव आ सकता है

  • भारतीय निर्यातकों को नए बाजार तलाशने पड़ सकते हैं

  • ऊर्जा आयातक देशों पर भूराजनीतिक दबाव बढ़ सकता है

निष्कर्ष: यह प्रस्तावित प्रतिबंध विधेयक भारत को एक उच्च-दांव वाले वैश्विक व्यापार संकट के केंद्र में ला खड़ा करता है। टैरिफ 50% पर टिके रहेंगे या 500% तक पहुंचेंगे—यह अब वॉशिंगटन के राजनीतिक फैसलों पर निर्भर है, जो भारत के व्यापार भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं।

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